वो भी दिवानी हो रही है शा'इरी पढ़ कर मिरी बेरोजगारी में जगी एक नौकरी की आस है
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जहान भर में न हो मुयस्सर जो कोई शाना, हमें बताना नहीं मिले गर कोई ठिकाना तो लौट आना, हमें बताना कुछ ऐसी बातें जो अनकही हों, मगर वो अंदर से खा रही हों लगे किसी को बताना है पर नहीं बताना, हमें बताना
Vikram Gaur Vairagi
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ख़मोशी तो यही बतला रही है उदासी रास मुझ को आ रही है मुझे जिन ग़लतियों से सीखना था वही फिर ज़िंदगी दोहरा रही है
Vishal Singh Tabish
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मैं न कहता था हिज्र कुछ भी नहीं ख़ुद को हलकान कर रही थी तुम कितने आराम से हैं हम दोनों देखा बेकार डर रही थी तुम
Mehshar Afridi
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हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रही
Dushyant Kumar
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बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे
Nida Fazli
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ज़िन्दगी के मंच पर किरदार पूरा हो गया है ये सभी ताली बजाएँगे यक़ीं है अब हमें भी
Ganesh gorakhpuri
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उछालेंगे सभी क़िस्से मिरे तौहीन भी होगी अगर तुम को यक़ीं है तो ज़माने से नहीं डरना
Ganesh gorakhpuri
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वस्ल का दिन अभी पूछ लो तुम हिज्र में रात काटी गई है
Ganesh gorakhpuri
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एक कमरे में गँवा दी उम्र सारी ये वकालत भी बहुत आसाँ नहीं है
Ganesh gorakhpuri
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फ़ासला महसूस होने जब लगे तो याद रखना हम ज़ियादा वक़्त लेते भी नहीं हैं फ़ैसले में
Ganesh gorakhpuri
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