वस्ल का दिन अभी पूछ लो तुम हिज्र में रात काटी गई है
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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ज़िन्दगी के मंच पर किरदार पूरा हो गया है ये सभी ताली बजाएँगे यक़ीं है अब हमें भी
Ganesh gorakhpuri
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सब राजा और साथ में सारे इक्के भी थे शामिल ये ज़िंदगी किसी जोकर से कभी नहीं जीती मैं ने
Ganesh gorakhpuri
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कह न पाया मैं किसी से इश्क़ की वो दास्ताँ इस तरह बेरोज़गारी में गुज़ारी ज़िंदगी
Ganesh gorakhpuri
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उछालेंगे सभी क़िस्से मिरे तौहीन भी होगी अगर तुम को यक़ीं है तो ज़माने से नहीं डरना
Ganesh gorakhpuri
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दोनों लोगों के दरमियान कुछ था फिर भी हम चुप थे कुछ बादशाह हैं दुनियां में जो बदनसीब होते हैं
Ganesh gorakhpuri
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