sherKuch Alfaaz

वो पेड़ यूँँ पत्तों से जुदा रहने लगा है जैसे कोई अपनों से जुदा रहने लगा है पैसों की कमी आए न बच्चों पे कभी भी वो बाप तो बच्चों से जुदा रहने लगा है

Related Sher

बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं

Umair Najmi

1244 likes

इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते

Farhat Ehsaas

124 likes

मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे

Ali Zaryoun

129 likes

तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं

Mirza Ghalib

123 likes

दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता

Waseem Barelvi

105 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on salman khan "samar".

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with salman khan "samar"'s sher.