यहाँ ख़त हैं लिखे रक्खे कई बेनाम बेमंज़िल मुझे डर है कि क़ासिद ख़त सर-ए-अख़बार करता है
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रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते हैं कई पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई?
Umair Najmi
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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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बा'द मुद्दत वो मिलने आते हैं ख़्वाब पहले दिखाए जाते हैं फ़ासले याद के सबब तो हैं हाँ मगर दिल बहुत जलाते हैं
Shan Sharma
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हमारे दरमियाँ जो है गवारा हो नहीं सकता यही मैं तुम रहा तो कुछ हमारा हो नहीं सकता मुझे तो इश्क़ लगता है ख़ुदा का मो'जिज़ा कोई मिरा जिस्मों की चाहत से गुज़ारा हो नहीं सकता
Shan Sharma
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आँसू आ कर ग़म को ऐसे धो जाते गंगा माँ धोती हैं जैसे पापों को
Shan Sharma
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शिकवे हम को पास हमेशा ले आते माँझा गुँजला होता है सुलझाने को
Shan Sharma
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इश्क़ पनपेगा तो फिर अश्कों की होंगी बारिशें पेड़ लगने पर कभी सूखी ज़मीं रहती नहीं
Shan Sharma
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