यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता है कई झूटे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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ये कहते हो तिरे जाने से दिल को चैन आएगा तो जाता हूँ, ख़ुदा हाफ़िज़! मगर तुम झूठ कहते हो
Zubair Ali Tabish
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आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
Waseem Barelvi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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उस सेे कहो इक बार मेरा नाम पुकारे उस के बिना साँसों का रिदम टूट रहा है
Ankit Maurya
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ये बद-नसीबी नहीं है तो और फिर क्या है सफ़र अकेले किया हम-सफ़र के होते हुए
Haseeb Soz
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अपनी ग़ैरत के लिए फ़ाक़ा-कशी भी मंज़ूर तेरी शर्तों पे ख़ज़ाना भी नहीं चाहते हम
Haseeb Soz
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तेरे मेहमान के स्वागत का कोई फूल थे हम जो भी निकला हमें पैरों से कुचल कर निकला
Haseeb Soz
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ख़ुद को इतना जो हवा-दार समझ रक्खा है क्या हमें रेत की दीवार समझ रक्खा है
Haseeb Soz
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