ये बद-नसीबी नहीं है तो और फिर क्या है सफ़र अकेले किया हम-सफ़र के होते हुए
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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अपनी ग़ैरत के लिए फ़ाक़ा-कशी भी मंज़ूर तेरी शर्तों पे ख़ज़ाना भी नहीं चाहते हम
Haseeb Soz
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ख़ुद को इतना जो हवा-दार समझ रक्खा है क्या हमें रेत की दीवार समझ रक्खा है
Haseeb Soz
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तेरे मेहमान के स्वागत का कोई फूल थे हम जो भी निकला हमें पैरों से कुचल कर निकला
Haseeb Soz
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यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता है कई झूटे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है
Haseeb Soz
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