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यहाँ तक आने से पहले ये हम भी सोचते थे ये लोग नाचते क्यूँँ हैं उदास गानों पर

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इस कहानी में कहीं नाम हमारा भी तो था उस सेे कहना कि सिकन्दर कभी हारा भी तो था

Mohit Dixit

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ज़ेहन-ओ-दिल में मेरे पेच है इक फँसी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी इश्क़ है तुझ सेे या है महज़ दिल-लगी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी ये तअल्लुक़ भी आसाँ नहीं हम-सफ़र मोड़ आने हैं आएँगे आगे मगर घर पलटने का ये मोड़ है आख़िरी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी

Mohit Dixit

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न पहला था न हूँ मैं आख़िरी ही बज़्मे-जानाँ में मगर मैं चाहता था सिलसिला मुझ पे रुका होता

Mohit Dixit

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उन सेे कह दो कहानियाँ न कहें मैं कहानी में जैसे था ही नहीं

Mohit Dixit

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इक हुस्न-ए-बे-मिसाल है मेरी निगाह में देखो उस ओर मेरा इशारा है उस तरफ़ अब नाव अपनी डूबने वाली है साथियों जो तैर सकते हो तो किनारा है उस तरफ़

Mohit Dixit

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