या'नी सुकून-ए-क़ल्ब क़ज़ा चाहता हूँ मैं इस दर्द-ए-ला-दवा की दवा चाहता हूँ मैं
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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उस की तस्वीरें हैं दिलकश तो होंगी जैसी दीवारें हैं वैसा साया है एक मैं हूँ जो तेरे क़त्ल की कोशिश में था एक तू है जो जेल में खाना लाया है
Tehzeeb Hafi
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नुसरत-ए-हक़ देखना आशूर तक ले जाएगी हसरत-ए-दीदार कोह-ए-तूर तक ले जाएगी
''Akbar Rizvi"
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जिस सेे डरते थे ज़माने के सितमगर सारे आज के दौर का वो मालिक-ए-अश्तर न रहा
''Akbar Rizvi"
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बस ऐसे इलाके को नज़र ढूॅंढ रही है दरिया जहाँ मिलता है समुंदर नहीं मिलता
''Akbar Rizvi"
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दूर अहबाब से रहता हूँ यूँँ ही तो अकबर न पता कौन सा इक ज़ख़्म नया मिल जाए
''Akbar Rizvi"
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मुझ को ख़बर हुई न लहद आ गई क़रीब किस तर हाँ बढ़ रही है ये रफ़्तारें ज़िंदगी
''Akbar Rizvi"
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