यक़ीन होने लगा है तिरी जुदाई का ग़म बहुत ही जल्द मुझे ख़ाक में मिला देगा
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रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
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मना भी लूँगा गले भी लगाऊँगा मैं 'अली' अभी तो देख रहा हूँ उसे ख़फ़ा कर के
Ali Zaryoun
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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब' कि लगाए न लगे और बुझाए न बने
Mirza Ghalib
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ
Waseem Barelvi
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ये शे'र बाद-ए-शजर तुर्बत-ए-शजर पे लिखो सफ़र सफ़र में सफ़र ज़िंदगी का ख़त्म हुआ
Shajar Abbas
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ये मुहब्बत मेरा असासा है मुझ सेे मत छीन इस असासे को
Shajar Abbas
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ज़िंदगी उजड़े हुए घर की तरह लगती है बाप का साया अगर सर पे नहीं होता है
Shajar Abbas
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ये ज़मीं आसमान दे दूँगा मैं तुम्हें दो जहान दे दूँगा और क्या दूँ भला सुबूत-ए-वफ़ा जान माँगोगे जान दे दूँगा
Shajar Abbas
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या इलाही हो ख़ैर क़ासिद की उन की अब कुछ ख़बर नहीं आती
Shajar Abbas
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