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ये आँखें अब ख़्वाब नए क्यूँ देखेंगी इन आँखों में ख़्वाब तुम्हारे ठहरे थे

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तुम हुई हो जो चाहत किसी और की थी हमेशा से मन्नत किसी और की दूर जाना पड़ेगा तुम्हें एक दिन क्योंकि तुम हो अमानत किसी और की

Naimish trivedi

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नैन खारे लिए हम को जीना पड़ा दर्द सारे लिए हम को जीना पड़ा वक़्त के साथ जीना कठिन था मगर बस तुम्हारे लिए हम को जीना पड़ा

Naimish trivedi

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हाथ से जब निकलने लगी ज़िन्दगी लोग रटने लगे ज़िन्दगी ज़िन्दगी छोड़ जाएगी तुम को भी बस एक दिन है नहीं ये किसी की सगी ज़िन्दगी

Naimish trivedi

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हर निशानी को ख़ुद ही मिटाना पड़ा आसुँओ के ही संग मुस्कुराना पड़ा एक लड़की ने जब, बेसहारा किया इक क़लम को सहारा बनाना पड़ा

Naimish trivedi

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तोड़ कर हर क़सम इक क़सम के लिए साथ हम हर ख़ुशी और ग़म के लिए एक वा'दा किया उस ने' हम सेे यही एक होंगे सदा हर जनम के लिए

Naimish trivedi

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