ये आवारा है परवाना ख़ता पर ताब ने की है न दिखती ताब-ए-लौ इस को न तेरे ताब से जलता
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
Charagh Sharma
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अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे
Waseem Barelvi
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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ये मुहब्बत की किताबें कौन यूँँ कब तक पढ़े कौन मारे रोज़ ही इक बात पे अपना ही मन
nakul kumar
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मिरे ख़िलाफ़ ही सब दस्तख़त हुए आख़िर मैं चुप रहा तो गुनहगार मुझ को माना है
arjun chamoli
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ये बताओ इश्क़ का ये फ़लसफ़ा क्या है दूरियाँ जब मिट गई तो अब बचा क्या है
arjun chamoli
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उसे तो मौत की लज़्ज़त को ख़ुद महसूस करना था दिया जाम-ए-शहादत है मुझे बाँहों में भर कर यूँँ
arjun chamoli
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मेरे बयान का मतलब बदल दिया उस ने सवाल करता था जो मेरा रहनुमा बनकर
arjun chamoli
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ये शरमाते तू कहे यूँँ कि मैं इतनी सुंदर कहाँ हूँ मिरी आँखों की ये तौहीन नहीं तो फिर और क्या है
arjun chamoli
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