ये गोया आदमी भी आदमी होता लिहाज़-ए-इश्क़ भी तो लाज़मी होता
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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सच बताओं मर्सिया-ख़्वानी किसे मालूम है आँख से बहता हुआ पानी किसे मालूम है
Manohar Shimpi
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तिफ़्ल-ए-हसीं क़िस्सा बयाँ करने लगा सुनके हँसी से पेट ही भरने लगा
Manohar Shimpi
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तुलू-ए-सुब्ह हर दिन कुछ बताए है नई उम्मीद जीने की जगाए है
Manohar Shimpi
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ज़िक्र जब भी हो गुनाहों का 'मनोहर' फ़ैसला तो फिर अदालत ही करेगी
Manohar Shimpi
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सितारों के सिवा भी ये निराली ही मुझे लगती चराग़ों से सजी महफ़िल दिवाली ही मुझे लगती
Manohar Shimpi
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