ये ही मेरी ख़ूबी थी कल शाम तक भूल जाते थे किसी का नाम तक
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़िक्र तिरा अब भी बेकार नहीं जाता हम टूट जाते हैं बस नज़र नहीं आता
Govind kumar
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पूछ सकते हैं आप अब कुछ भी काम आ जाए बात कब कुछ भी बात दिल की करें भी तो कैसे पास अपने नहीं है जब कुछ भी
Govind kumar
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ज़िंदा-दिल लोग भी ऐसे में रोते हैं जब किसी अपने को वो कहीं खोते हैं
Govind kumar
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यूँँ तो जान चला जाता हूँ तुझ सेे दूर मगर इस दिल से तेरी बातों का जाल नहीं जाता
Govind kumar
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ज़िंदगी अच्छे से जीने का तरीक़ा आ गया जब से चुप रहने का, सुनने का सलीक़ा आ गया
Govind kumar
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