ये किस का अक्स है हर सू समाया छुपा है कौन मेरी पुतलियों में
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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रोती हूँ तो साथ साथ में बजते हैं वो पायल में ऐसे घुॅंघरू बाॅंध गया
Shiva awasthi
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गले से यूँँ मुझे लगाओ कभी, कि मेरी पसलियाँ चटख जाएँ
Shiva awasthi
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जितनी चहल पहल दोपहरी उतनी ख़ाली ख़ाली शाम सुरसा जैसी तन्हाई ने लो फिर मेरी खा ली शाम
Shiva awasthi
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मैं ख़ुद पर भी हँस लेती हूँ देख चुकी हूँ इतना रो कर
Shiva awasthi
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जाना आधी उम्र बिता कर मुझे ख़ुशी से डर लगता है
Shiva awasthi
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