ye kis maqam pe sujhi tujhe bichhadne ki ki ab to ja ke kahin din sanwarne wale the
Related Sher
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
594 likes
मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
566 likes
हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
563 likes
मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
271 likes
लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
88 likes
More from Jamal Ehsani
वो इंतिक़ाम की आतिश थी मेरे सीने में मिला न कोई तो ख़ुद को पछाड़ आया हूँ
Jamal Ehsani
0 likes
आँखों से अब वो ख़्वाब को निस्बत नहीं रही इक उम्र हो गई ये समुंदर ख़राब है
Jamal Ehsani
0 likes
ये ग़म नहीं है कि हम दोनों एक हो न सके ये रंज है कि कोई दरमियान में भी न था
Jamal Ehsani
37 likes
न वो हसीन न मैं ख़ूब-रू मगर इक साथ हमें जो देख ले वो देखता ही रह जाए
Jamal Ehsani
0 likes
याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है
Jamal Ehsani
54 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Jamal Ehsani.
Similar Moods
More moods that pair well with Jamal Ehsani's sher.







