ये सावन ,माह ये ज़ुल्मी जवानी ज़माने बा'द सब कच्चा लगेगा
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान अँधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान
Javed Akhtar
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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नज़र से नज़र को मिलाओ तो जानूँ लबो पे लबो को सजाओ तो जानूँ अगर मुझ से करते हो इतनी मोहब्बत मोहब्बत मैं मर कर दिखाओ तो जानूँ
Krishnavat Ritesh
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मेरे मालिक मेरे मौला तेरा बस इक सहारा हो जहाँ को जीत लाऊँ मैं तेरा बस इक इशारा हो
Krishnavat Ritesh
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हादसा ये देख कर के डर गया है अब ज़माने से मिरा मन भर गया है
Krishnavat Ritesh
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हम ने सोचा था तुम को सजाऍंगे जी अपनी दुल्हन तुम्हें हम बनाऍंगे जी मारकर जाओगी हम ने सोचा न था ग़ैर की बाहों में तुम को पाएँगे जी
Krishnavat Ritesh
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मैं बरसाने को जाऊँगा मैं कान्हा को मनाऊँगा जो कान्हा मान जाएँ तो उन्हें कुंदन बना लूँगा
Krishnavat Ritesh
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