ये सोचता ख़राब है कहता ख़राब है दावे से कह रहा हूँ ये बंदा ख़राब है
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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ज़िक्र करता था जो दिन भर उस का हिज्र में मर गया शायर उस का सुनता रहता हूँ पशेमाँ हो कर ज़िक्र जब करते हैं दीगर उस का
Daqiiq Jabaalii
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ज़ीस्त की सम्त से ताज़ीर बराबर आई पर मुबीं होता नहीं ग़लती हमारी क्या है
Daqiiq Jabaalii
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तुम ने 'अमित' परियों को देखा है कभी परियों के जैसे ही वो दिखती थी अमित
Daqiiq Jabaalii
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तुम ख़ुश-नसीब हो जो कि रो लेते हो मियाँ दिक्कत हमारे साथ है हम क्या करें ‘अमित’
Daqiiq Jabaalii
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ये शिकायत क्यूँँ नहीं मुझ को किसी से ये बताओ क्या मैं सच-मुच मर गया हूँ
Daqiiq Jabaalii
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