यूँँ न क़ातिल को जब यक़ीं आया हम ने दिल खोल कर दिखाई चोट
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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उम्मीद के वादों से जी कुछ तो बहलता था अब ये भी तेरे ग़म को मंज़ूर नहीं होते
Fani Badayuni
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ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है
Fani Badayuni
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अब न काँटों ही से कुछ लाग न फूलों से लगाओ हम ने देखा है तमाशा तेरी रा'नाई का
Fani Badayuni
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इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का ज़िन्दगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का
Fani Badayuni
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सुने जाते न थे तुम सेे मिरे दिन रात के शिकवे कफ़न सरकाओ मेरी बे-ज़बानी देखते जाओ
Fani Badayuni
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