यूँँ भी नाकाम किया ज़िंदगी को उम्र भर काम ही करते रहे हम
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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उसे हर वक़्त करता हूँ महसूस वो जिसे आज तक छुआ ही नहीं
Prit
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कभी ब्याही थी बेटियाँ हम ने कभी की थी ज़कात फूलों की
Prit
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पास थे हम मगर कुछ ऐसे थे जनवरी थी वो मैं दिसंबर था
Prit
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इश्क़ कर 'प्रीत' इश्क़ कर बस इश्क़ आप हो जाएँगे बचे सब काम
Prit
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इश्क़ में उस ने ताज बनवाया बुतों को जिस ने माना था पत्थर
Prit
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