sherKuch Alfaaz

यूसुफ़ न बन सका कभी तेरी निगाह में लेकिन तुझे तो मैं ने ज़ुलेख़ा बना दिया

More from SALIM RAZA REWA

शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

SALIM RAZA REWA

0 likes

ये है दुआ तुम्हारा मुक़द्दर बुलंद हो तुम को तमाम उम्र ख़ुशी ही ख़ुशी मिले

SALIM RAZA REWA

1 likes

ज़रा सी बात पे रिश्तों को कर दिया घाइल ज़रा सी बात को ले कर उदास बैठे हैं  

 तेरे बग़ैर हर इक शय की आँख पुरनम है 
 हमीं नहीं मह-ओ-अख़्तर उदास बैठे हैं

SALIM RAZA REWA

1 likes

तुम्हारे प्यार की ख़ुश्बू हमेशा साथ रहती है तुम्हारी याद के लश्कर मुझे तन्हा नहीं करते

SALIM RAZA REWA

1 likes

ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है टूटा फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही अपना घर तो अपना ही घर होता है

SALIM RAZA REWA

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on SALIM RAZA REWA.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with SALIM RAZA REWA's sher.