yun to hum ahl-e-nazar hain magar anjam ye hai dhundte dhundte kho dete hain binai tak
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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वाक़िआ' कुछ भी हो सच कहने में रुस्वाई है क्यूँँ न ख़ामोश रहूँ अहल-ए-नज़र कहलाऊँ
Shahzad Ahmad
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तुझ में कस-बल है तो दुनिया को बहा कर ले जा चाय की प्याली में तूफ़ान उठाता क्या है
Shahzad Ahmad
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मुमकिन हो आप से तो भुला दीजिए मुझे पत्थर पे हूँ लकीर मिटा दीजिए मुझे
Shahzad Ahmad
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जलते हैं इक चराग़ की लौ से कई चराग़ दुनिया तिरे ख़याल से रौशन हुई तो है
Shahzad Ahmad
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ये समझ के माना है सच तुम्हारी बातों को इतने ख़ूब-सूरत लब झूट कैसे बोलेंगे
Shahzad Ahmad
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