ज़ब्त मुझ में रहा नहीं अब वो इस लिए दूर दूर रहता हूँ
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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दिख रहा था जो ख़ून पानी पे जान दे बैठा वो निशानी पे
gaurav saklani
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राज़ खुलता है घर जलाने को घर कभी आग से नहीं जलता
gaurav saklani
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एक इंसान ही नहीं है बस उम्र बीतेगी ये भुलाने में
gaurav saklani
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तोड़ के रख दिया मुझे जिस ने लग रहा है मुझे क़मर फिर भी
gaurav saklani
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मेरे अंदर भी कोई रहता है जो भी है बस ख़ुदा नहीं रहता
gaurav saklani
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