दिख रहा था जो ख़ून पानी पे जान दे बैठा वो निशानी पे
Related Sher
जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
368 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
271 likes
ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
173 likes
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
More from gaurav saklani
शे'र आमद ये हो रहे हैं जो हाथ अंसारी का है इस में सब
gaurav saklani
0 likes
एक इंसान ही नहीं है बस उम्र बीतेगी ये भुलाने में
gaurav saklani
0 likes
ज़ब्त मुझ में रहा नहीं अब वो इस लिए दूर दूर रहता हूँ
gaurav saklani
0 likes
ज़िंदगी क्यूँ तुम्हें शिकायत है दे दिया ख़ून-ए-दिल जिगर फिर भी
gaurav saklani
2 likes
ज़िक्र तुम ने किया मगर फिर भी हो रहा क्यूँ नहीं असर फिर भी
gaurav saklani
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on gaurav saklani.
Similar Moods
More moods that pair well with gaurav saklani's sher.







