एक इंसान ही नहीं है बस उम्र बीतेगी ये भुलाने में
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
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शे'र आमद ये हो रहे हैं जो हाथ अंसारी का है इस में सब
gaurav saklani
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ज़ब्त मुझ में रहा नहीं अब वो इस लिए दूर दूर रहता हूँ
gaurav saklani
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राज़ खुलता है घर जलाने को घर कभी आग से नहीं जलता
gaurav saklani
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ज़िंदगी क्यूँ तुम्हें शिकायत है दे दिया ख़ून-ए-दिल जिगर फिर भी
gaurav saklani
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मेरे अंदर भी कोई रहता है जो भी है बस ख़ुदा नहीं रहता
gaurav saklani
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