ज़िक्र तुम ने किया मगर फिर भी हो रहा क्यूँ नहीं असर फिर भी
Related Sher
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
368 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
298 likes
More from gaurav saklani
ज़ब्त मुझ में रहा नहीं अब वो इस लिए दूर दूर रहता हूँ
gaurav saklani
0 likes
मेरे अंदर भी कोई रहता है जो भी है बस ख़ुदा नहीं रहता
gaurav saklani
1 likes
शे'र आमद ये हो रहे हैं जो हाथ अंसारी का है इस में सब
gaurav saklani
0 likes
ज़िंदगी क्यूँ तुम्हें शिकायत है दे दिया ख़ून-ए-दिल जिगर फिर भी
gaurav saklani
2 likes
एक शाइ'र ग़ज़ल सुनाता है बहरस दूर है डगर फिर भी
gaurav saklani
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on gaurav saklani.
Similar Moods
More moods that pair well with gaurav saklani's sher.







