एक शाइ'र ग़ज़ल सुनाता है बहरस दूर है डगर फिर भी
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जौन तुम्हें ये दौर मुबारक, दूर ग़म-ए-अय्याम से हो एक पागल लड़की को भुला कर अब तो बड़े आराम से हो
Jaun Elia
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करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़ दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से
Tehzeeb Hafi
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किसी से दूरी बनाई किसी के पास रहे हज़ार कोशिशें कर लीं मगर, उदास रहे
Sawan Shukla
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सिर्फ़ दो ही लोग दिन भर साथ थे इक ग़ज़ल का एक मिसरा और मैं
Divy Kamaldhwaj
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धूप पड़े उस पर तो तुम बादल बन जाना अब वो मिलने आए तो उस को घर ठहराना। तुम को दूर से देखते देखते गुज़र रही है मर जाना पर किसी गरीब के काम न आना।
Tehzeeb Hafi
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ज़ब्त मुझ में रहा नहीं अब वो इस लिए दूर दूर रहता हूँ
gaurav saklani
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शे'र आमद ये हो रहे हैं जो हाथ अंसारी का है इस में सब
gaurav saklani
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राज़ खुलता है घर जलाने को घर कभी आग से नहीं जलता
gaurav saklani
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दर्द का क़ाफ़िला नहीं रुकता साँसों का सिलसिला नहीं रुकता मुझ में ही मैं रहा नहीं हूँ अब ग़म का जो दाख़िला नहीं रुकता
gaurav saklani
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कर भी लेगें जो ख़ुद-कुशी तो क्या मौत के बा'द ग़म नहीं होगा
gaurav saklani
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