कर भी लेगें जो ख़ुद-कुशी तो क्या मौत के बा'द ग़म नहीं होगा
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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एक इंसान ही नहीं है बस उम्र बीतेगी ये भुलाने में
gaurav saklani
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शे'र आमद ये हो रहे हैं जो हाथ अंसारी का है इस में सब
gaurav saklani
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ज़ब्त मुझ में रहा नहीं अब वो इस लिए दूर दूर रहता हूँ
gaurav saklani
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किस तरह से ये मोहब्बत को बनाया है तमाशा है उतारा इस तरह ख़ंजर कि ज़ाया' है तमाशा
gaurav saklani
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आँखों की चौखट पड़ी है धूल मतलब वक़्त ने तोड़ा था पर बिखरा नहीं था
gaurav saklani
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