सिर्फ़ दो ही लोग दिन भर साथ थे इक ग़ज़ल का एक मिसरा और मैं
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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रोते बच्चे पूछ रहे हैं मम्मी से कितना पानी और मिलाया जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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मेरे भीतर नहीं लिखने की तड़पन है तड़पन, इस लिए मैं लिख रहा हूँ
Divy Kamaldhwaj
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तुम्हें ज़रूरत क्या कोई त्योहारों की रंग लगाकर गले लगाने आ जाओ
Divy Kamaldhwaj
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मेरे भीतर नहीं लिखने की तड़पन है तड़पन, इस लिए मैं लिख रहा हूँ
Divy Kamaldhwaj
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भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
Divy Kamaldhwaj
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