ज़ख़्मों को गुदगुदाते चलिए आप दर्द को यूँँ हँसाते चलिए आप
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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जौन' उठता है यूँँ कहो या'नी 'मीर'-ओ-'ग़ालिब' का यार उठता है
Jaun Elia
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दर्द ऐसा नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकते जब्त ऐसा की हम आवाज नहीं कर सकते बात तो तब थी कि तू छोड़ के जाता ही नहीं अब तेरे मिलने पे हम नाज नहीं कर सकते
Ismail Raaz
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ज़िंदगी हर सबक़ सलीक़े से जाते जाते सिखाते जाती है
Raj Tiwari
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ज़िंदगी इक ख़ूब-सूरत हादिसा है शक्ल मिट्टी की घड़ी बहती हवा है आँसुओं से तुम सदा दो आएगा वो हाल-ए-दिल वो जानता है वो ख़ुदा है
Raj Tiwari
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ज़मीं के ख़ुश्क पत्तों को हवाएँ ले उड़ीं जो शाख़ों से जुड़े थे वो हरे भरे रहे
Raj Tiwari
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ज़मीं भी वही है वही आसमाँ है नए साल में कुछ नया सा कहाँ है
Raj Tiwari
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न कश्ती पर न साहिल पर न ही दरिया पर आएगा अगर तू डूबा तो इल्ज़ाम तेरे ही सर आएगा
Raj Tiwari
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