ज़मीं भी वही है वही आसमाँ है नए साल में कुछ नया सा कहाँ है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ज़मीं के ख़ुश्क पत्तों को हवाएँ ले उड़ीं जो शाख़ों से जुड़े थे वो हरे भरे रहे
Raj Tiwari
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ज़ख़्मों को गुदगुदाते चलिए आप दर्द को यूँँ हँसाते चलिए आप
Raj Tiwari
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तुम्हें देखे बहुत दिन हो गए हैं हम अब दिन गिन रहे हैं उँगलियों पर
Raj Tiwari
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मोहब्बतों का सिलसिला बदल गया वफ़ा का एक दौर था बदल गया
Raj Tiwari
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मुझे पत्थरों से गिला नहीं सभी फूल थे मिरे राज़दाँ सभी फूल से मिली ठोकरें हुआ हादसा मिरी राह में
Raj Tiwari
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