ज़मीं के ख़ुश्क पत्तों को हवाएँ ले उड़ीं जो शाख़ों से जुड़े थे वो हरे भरे रहे
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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सोचता हूँ कि यूँँ न हो इक दिन ये ज़मीं कोई आसमाँ निकले
Vikas Rana
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बोझ उठाए हुए फिरती है हमारा अब तक ऐ ज़मीं माँ तिरी ये उम्र तो आराम की थी
Parveen Shakir
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जितनी बटनी थी बट चुकी ये ज़मीं अब तो बस आसमान बाक़ी है
Rajesh Reddy
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मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो आसमाँ लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो
Rahat Indori
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ज़िंदगी हर सबक़ सलीक़े से जाते जाते सिखाते जाती है
Raj Tiwari
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ज़िंदगी इक ख़ूब-सूरत हादिसा है शक्ल मिट्टी की घड़ी बहती हवा है आँसुओं से तुम सदा दो आएगा वो हाल-ए-दिल वो जानता है वो ख़ुदा है
Raj Tiwari
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राज इस फ़ैसले पर ज़रा ग़ौर कर ज़िंदगी का सफ़र तन्हा कटता नहीं
Raj Tiwari
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वक़्त पर कामयाब होना दोस्त वक़्त वरना बहुत लगेगा दोस्त
Raj Tiwari
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वहाँ मुस्कुराती हुई धूप है जहाँ रौशनी हम बिछाते गए
Raj Tiwari
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