राज इस फ़ैसले पर ज़रा ग़ौर कर ज़िंदगी का सफ़र तन्हा कटता नहीं
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कोई तुम्हारा सफ़र पर गया तो पूछेंगे रेल देख के हम हाथ क्यूँ हिलाते हैं
Tehzeeb Hafi
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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आज पहली दफ़ा लगा मुझ को वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को बस बिना बात ही बिगड़ता था बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को
Sandeep Thakur
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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं
Abrar Kashif
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माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं सर पे आँचल नहीं होता है तो डर होता है
Anjum Rehbar
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ख़ामुशी जिन को समझदार बनाती है 'राज' अपनी आवाज़ को वो लोग तरस जाते हैं
Raj Tiwari
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ज़िंदगी हर सबक़ सलीक़े से जाते जाते सिखाते जाती है
Raj Tiwari
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ज़बाँ दिल की यहाँ पर कौन समझे ख़मोशी को यहाँ सब मौन समझे
Raj Tiwari
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मेरी और उस की कहानी एक सी है ग़ालिबन रो पड़ा है वो जो मेरी दास्ताँ सुनते हुए
Raj Tiwari
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मिरी हर इक नज़र जिस पर ठहरती है बस उस की इक नज़र का मुंतज़िर हूँ मैं
Raj Tiwari
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