sherKuch Alfaaz

मिरी हर इक नज़र जिस पर ठहरती है बस उस की इक नज़र का मुंतज़िर हूँ मैं

Raj Tiwari1 Likes

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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता

Parveen Shakir

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मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है

Nadir Ariz

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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने

Zia Mazkoor

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मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के, ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से, मोहब्बत हो गई तुम से

Zubair Ali Tabish

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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

Ali Zaryoun

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