बोझ उठाए हुए फिरती है हमारा अब तक ऐ ज़मीं माँ तिरी ये उम्र तो आराम की थी
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मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो आसमाँ लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो
Rahat Indori
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
Waseem Barelvi
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पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
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तू तो फिर अपनी जान है तेरा तो ज़िक्र क्या हम तेरे दोस्तों के भी नख़रे उठाएँगे
Ali Zaryoun
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उस से इक बार तो रूठूँ मैं उसी की मानिंद और मेरी तरह से वो मुझ को मनाने आए
Parveen Shakir
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ये दुख नहीं कि अँधेरो से सुल्ह की हम ने मलाल ये है कि अब सुब्ह की तलब भी नहीं
Parveen Shakir
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दुख तो ऐसा है कि दिल आँख से कट कट के बहे एक वा'दा है कि रोने नहीं देता मुझ को
Parveen Shakir
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उस ने जलती हुई पेशानी पे जब हाथ रखा रूह तक आ गई तासीर मसीहाई की
Parveen Shakir
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मर भी जाऊँ तो कहाँ लोग भुला ही देंगे लफ़्ज़ मेरे मेरे होने की गवाही देंगे
Parveen Shakir
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