ज़माने से जुदा लगते हुए हम मिलेंगे आप से हँसते हुए हम हमारे सामने से ही गया वो खड़े थे हाथ को मलते हुए हम
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें
Vikram Gaur Vairagi
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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ज़बाँ में चाशनी रखने लगे हम यही दस्तूर है दुनिया का साहब
Kush Pandey ' Saarang '
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ज़रा चेहरा तो हम को तुम दिखा दो न जाने कब ये दुनिया छोड़ जाऊँ
Kush Pandey ' Saarang '
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कभी भी जिस्म की बातें बदन का जिक्र ना होगा सो ऐ लड़की ग़ज़ल को तुम कभी डर कर नहीं पढ़ना अगर मैं सेज दिल का कह रहा हूँ, इस ग़ज़ल में तो उसे दिल सेज ही पढ़ना कभी बिस्तर नहीं पढ़ना
Kush Pandey ' Saarang '
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रोने से तो मन हल्का हो जाएगा बाकी ग़म सारे याद रहेंगे तुम को
Kush Pandey ' Saarang '
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उन्हें दिल तख़्त पे बैठा चुके हैं अँगूठी फिर भी वो लौटा चुके हैं सड़क अब गाँव तक तो आ चुकी है मगर इस गाँव से सब जा चुके हैं
Kush Pandey ' Saarang '
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