कभी भी जिस्म की बातें बदन का जिक्र ना होगा सो ऐ लड़की ग़ज़ल को तुम कभी डर कर नहीं पढ़ना अगर मैं सेज दिल का कह रहा हूँ, इस ग़ज़ल में तो उसे दिल सेज ही पढ़ना कभी बिस्तर नहीं पढ़ना
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
Bashir Badr
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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
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प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं जानू वरना तू समुंदर है तो होगा मेरे किस काम का है
Rahat Indori
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फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था
Adeem Hashmi
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ज़बाँ में चाशनी रखने लगे हम यही दस्तूर है दुनिया का साहब
Kush Pandey ' Saarang '
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भले तुम नेक दिल बन्दे हो साहब मगर हर शख़्स अच्छा ना कहेगा "वो हम को चाहकर भी मिल न पाया" कईयों दिल में ऐसा ग़म रहेगा
Kush Pandey ' Saarang '
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फ़क़त ग़म के नहीं मारे मियाँ हम हमें किस्मत ने भी मारा बहुत है
Kush Pandey ' Saarang '
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फ़क़त घूंघट में ही रहना नहीं है गगन छूना है हर लड़की को साहब
Kush Pandey ' Saarang '
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हक़ीक़त में नहीं मिलना था तुझ को सो हम ख़्वाबों में तुझ को ला चुके हैं तुझे भाए नहीं ये ग़म रहेगा हसीनों को बहुत हम भा चुके हैं
Kush Pandey ' Saarang '
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