फ़क़त घूंघट में ही रहना नहीं है गगन छूना है हर लड़की को साहब
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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ज़बाँ में चाशनी रखने लगे हम यही दस्तूर है दुनिया का साहब
Kush Pandey ' Saarang '
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सियासी तख़्त पे बैठे हुए हो तभी इतना यहाँ ऐंठे हुए हो
Kush Pandey ' Saarang '
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सियासी जो परचम उठाए हुए हो मियाँ ख़ुद को क्या तुम बनाए हुए हो वही तो नहीं सुन रहा बात तेरी जिसे वोट देकर जिताए हुए हो
Kush Pandey ' Saarang '
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तमाशे को ये दुनिया देखती है विदूषक हँस के रोता भी है छुप कर
Kush Pandey ' Saarang '
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उसे भी रोकते किस बात से हम लड़े तन्हा यहाँ हर रात से हम
Kush Pandey ' Saarang '
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