ज़रा पाने की चाहत में बहुत कुछ छूट जाता है नदी का साथ देता हूँ समुंदर रूठ जाता है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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अब तो ख़ुद अपने ख़ून ने भी साफ़ कह दिया मैं आप का रहूॅंगा मगर उम्र भर नहीं
Aalok Shrivastav
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घर में झीने रिश्ते मैं ने लाखों बार उधड़ते देखे चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
Aalok Shrivastav
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यही तो एक तमन्ना है इस मुसाफ़िर की जो तुम नहीं तो सफ़र में तुम्हारा प्यार चले
Aalok Shrivastav
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पिछले बरस भी हम ने कलाई सजाई थी राखी के धागे आज भी कच्चे नहीं पड़े
Aalok Shrivastav
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नज़दीकी अक्सर दूरी का कारन भी बन जाती है सोच-समझ कर घुलना-मिलना अपने रिश्ते-दारों में
Aalok Shrivastav
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