ज़िंदगी में नित्य बढ़ता ये विजय रथ अब मिरा है हर घड़ी चल जो रहा संघर्ष का पथ अब मिरा है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ज़िंदगी भी चराग़ सी तो है एक पल में हवा बुझा जाए
Vinod Ganeshpure
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यूँँ मुझे देख कर लगा होगा है बड़ी ज़िंदगी हसीं अपनी
Vinod Ganeshpure
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यूँँ जहाँ में कहीं पर खड़ा हो गया आदमी फिर वहीं पे बड़ा हो गया
Vinod Ganeshpure
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ज़िंदगी आसमान सी ही है कर रही है तलाश ख़ुद ही को
Vinod Ganeshpure
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वादे निभा ले तोड़ मत रिश्ते बना के छोड़ मत कोई गले तेरे लगा तू मुह किसी से मोड़ मत
Vinod Ganeshpure
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