Top 20 Sher Series

Shayari of Mubarak Azimabadi

Shayari of Mubarak Azimabadi ek clean reading flow me, writer aur full-detail links ke saath.

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Series se pehle kuch standout sher padhein.

तेरी बख़्शिश के भरोसे पे ख़ताएँ की हैं तेरी रहमत के सहारे ने गुनहगार किया

जो निगाह-ए-नाज़ का बिस्मिल नहीं दिल नहीं वो दिल नहीं वो दिल नहीं

फूल क्या डालोगे तुर्बत पर मिरी ख़ाक भी तुम से न डाली जाएगी

रहने दे अपनी बंदगी ज़ाहिद बे-मोहब्बत ख़ुदा नहीं मिलता

तिरी अदा की क़सम है तिरी अदा के सिवा पसंद और किसी की हमें अदा न हुई

कब वो आएँगे इलाही मिरे मेहमाँ हो कर कौन दिन कौन बरस कौन महीना होगा

आप का इख़्तियार है सब पर आप पर इख़्तियार किस का है

अपनी सी करो तुम भी अपनी सी करें हम भी कुछ तुम ने भी ठानी है कुछ हम ने भी ठानी है

ले चला फिर मुझे दिल यार-ए-दिल-आज़ार के पास अब के छोड़ आऊँगा ज़ालिम को सितमगार के पास

इक तिरी बात कि जिस बात की तरदीद मुहाल इक मिरा ख़्वाब कि जिस ख़्वाब की ताबीर नहीं

किसी ने बर्छियाँ मारीं किसी ने तीर मारे हैं ख़ुदा रक्खे इन्हें ये सब करम-फ़रमा हमारे हैं

ये ग़म-कदा है इस में 'मुबारक' ख़ुशी कहाँ ग़म को ख़ुशी बना कोई पहलू निकाल के

शिकस्त-ए-तौबा की तम्हीद है तिरी तौबा ज़बाँ पे तौबा 'मुबारक' निगाह साग़र पर

ख़ैर साक़ी की सलामत मय-कदा जिस क़दर पी उतनी हुश्यारी बढ़ी

तेरी बख़्शिश के भरोसे पे ख़ताएँ की हैं तेरी रहमत के सहारे ने गुनहगार किया

जो निगाह-ए-नाज़ का बिस्मिल नहीं दिल नहीं वो दिल नहीं वो दिल नहीं

फूल क्या डालोगे तुर्बत पर मिरी ख़ाक भी तुम से न डाली जाएगी

रहने दे अपनी बंदगी ज़ाहिद बे-मोहब्बत ख़ुदा नहीं मिलता

तिरी अदा की क़सम है तिरी अदा के सिवा पसंद और किसी की हमें अदा न हुई

कब वो आएँगे इलाही मिरे मेहमाँ हो कर कौन दिन कौन बरस कौन महीना होगा

आप का इख़्तियार है सब पर आप पर इख़्तियार किस का है

अपनी सी करो तुम भी अपनी सी करें हम भी कुछ तुम ने भी ठानी है कुछ हम ने भी ठानी है

ले चला फिर मुझे दिल यार-ए-दिल-आज़ार के पास अब के छोड़ आऊँगा ज़ालिम को सितमगार के पास

इक तिरी बात कि जिस बात की तरदीद मुहाल इक मिरा ख़्वाब कि जिस ख़्वाब की ताबीर नहीं

किसी ने बर्छियाँ मारीं किसी ने तीर मारे हैं ख़ुदा रक्खे इन्हें ये सब करम-फ़रमा हमारे हैं

ये ग़म-कदा है इस में 'मुबारक' ख़ुशी कहाँ ग़म को ख़ुशी बना कोई पहलू निकाल के

शिकस्त-ए-तौबा की तम्हीद है तिरी तौबा ज़बाँ पे तौबा 'मुबारक' निगाह साग़र पर

ख़ैर साक़ी की सलामत मय-कदा जिस क़दर पी उतनी हुश्यारी बढ़ी

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Mubarak Azimabadi Top 20 me kya milega?

Mubarak Azimabadi ke selected sher readable cards, internal detail links, aur writer discovery ke saath milenge.

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