aaj main ne use nazdik se ja dekha hai vo daricha to mire qad se bahut uncha hai apne kamre ko andheron se bhara paaya hai tere baare men kabhi ghhaur se jab socha hai har tamanna ko rivayat ki tarah toda hai tab kahin ja ke zamana mujhe raas aaya hai tum ko shikva hai mire ahd-e-mohabbat se magar tum ne paani pe koi lafz kabhi likkha hai aisa bichhda ki mila hi nahin phir us ka pata haae vo shakhs jo aksar mujhe yaad aata hai koi us shakhs ko apna nahin kahta 'azar' apne ghar men bhi vo ghhairon ki tarah rahta hai aaj main ne use nazdik se ja dekha hai wo daricha to mere qad se bahut uncha hai apne kamre ko andheron se bhara paya hai tere bare mein kabhi ghaur se jab socha hai har tamanna ko riwayat ki tarah toda hai tab kahin ja ke zamana mujhe ras aaya hai tum ko shikwa hai mere ahd-e-mohabbat se magar tum ne pani pe koi lafz kabhi likkha hai aisa bichhda ki mila hi nahin phir us ka pata hae wo shakhs jo aksar mujhe yaad aata hai koi us shakhs ko apna nahin kahta 'azar' apne ghar mein bhi wo ghairon ki tarah rahta hai
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़
Varun Anand
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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
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आज मैं ने उसे नज़दीक से जा देखा है वो दरीचा तो मिरे क़द से बहुत ऊँचा है अपने कमरे को अँधेरों से भरा पाया है तेरे बारे में कभी ग़ौर से जब सोचा है हर तमन्ना को रिवायत की तरह तोड़ा है तब कहीं जा के ज़माना मुझे रास आया है तुम को शिकवा है मिरे अहद-ए-मोहब्बत से मगर तुम ने पानी पे कोई लफ़्ज़ कभी लिक्खा है ऐसा बिछड़ा कि मिला ही नहीं फिर उस का पता हाए वो शख़्स जो अक्सर मुझे याद आता है कोई उस शख़्स को अपना नहीं कहता 'आज़र' अपने घर में भी वो ग़ैरों की तरह रहता है
Kafeel Aazar Amrohvi
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उस की आँखों में उतर जाने को जी चाहता है शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है किसी कम-ज़र्फ़ को बा-ज़र्फ़ अगर कहना पड़े ऐसे जीने से तो मर जाने को जी चाहता है एक इक बात में सच्चाई है उस की लेकिन अपने वा'दों से मुकर जाने को जी चाहता है क़र्ज़ टूटे हुए ख़्वाबों का अदा हो जाए ज़ात में अपनी बिखर जाने को जी चाहता है अपनी पलकों पे सजाए हुए यादों के दिए उस की नींदों से गुज़र जाने को जी चाहता है एक उजड़े हुए वीरान खंडर में 'आज़र' ना-मुनासिब है मगर जाने को जी चाहता है
Kafeel Aazar Amrohvi
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