अब बस उस के दिल के अंदर दाखिल होना बाकी है छह दरवाज़े छोड़ चुका हूँ एक दरवाज़ा बाकी है दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है मैं बरसों से खोल रहा हूँ एक औरत की साड़ी को आधी दुनिया घूम चुका हूँ आधी दुनिया बाकी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है उस की ख़ातिर बाजारों में भीड़ भी है और रोनक भी मैं गुम होने वाला हूँ बस हाथ छुड़ाना बाकी है
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पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
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अगर तू बे-वफ़ा है ध्यान रखना मुझे सब कुछ पता है ध्यान रखना बिछड़ते वक़्त हम ने कह दिया था हमारा दिल दुखा है ध्यान रखना ख़ुदा जिस की मोहब्बत में बनी हो वो कइयों का ख़ुदा है ध्यान रखना जिसे तुम दोस्त केवल जानती हो वो तुम को चाहता है ध्यान रखना
Anand Raj Singh
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झूठों ने झूठों से कहा है सच बोलो सरकारी एलान हुआ है सच बोलो घर के अंदर तो झूठों की एक मंडी है दरवाज़े पर लिखा हुआ है सच बोलो गुलदस्ते पर यकजहती लिख रक्खा है गुलदस्ते के अंदर क्या है सच बोलो गंगा मइया डूबने वाले अपने थे नाव में किस ने छेद किया है सच बोलो
Rahat Indori
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मुझ से मिलता है पर जिस्म की सरहद पार नहीं करता इस का मतलब तू भी मुझ सेे सच्चा प्यार नहीं करता दुश्मन अच्छा हो तो जंग में दिल को ठारस रहती है दुश्मन अच्छा हो तो वो पीछे से वार नहीं करता रोज़ तुझे टूटे दिल कम क़ीमत पर लेना पड़ते हैं इस सेे अच्छा था तू इश्क़ का कारोबार नहीं करता
Tehzeeb Hafi
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चला है सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हें हक़ दे दिया किस ने दियों के दिल दुखाने का इरादा छोड़िए अपनी हदों से दूर जाने का ज़माना है ज़माने की निगाहों में न आने का कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का ये मैं ही था बचा के ख़ुद को ले आया किनारे तक समुंदर ने बहुत मौक़ा' दिया था डूब जाने का
Waseem Barelvi
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शाह से छुपके क़ैदी ने शहज़ादी को पैगाम लिखा जंग से भागने वालों में शहज़ादे का भी नाम लिखा दूरदराज़ से आने वाले ख़त मेरी हम सेाही के थे इक दिन उस ने हिम्मत कर के अपना असली नाम लिखा हम दोनों ने अपने अपने दीन पे क़ाएम रहना था घर की इक दीवार पे अल्लाह इक दीवार पे राम लिखा एक मोहब्बत ख़त्म हुई तो दूसरी की तैयारी की नई कहानी के आगाज में पहली का अंजाम लिखा
Zia Mazkoor
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इस सेे आप का दुख भी हो जाएगा अच्छा ख़ासा कम मुझ पर गुज़रे लम्हों में से कर दो बस एक लम्हा कम बड़े-बड़े शहरों में कोई कैसे किसी से प्यार करे जितने आमने सामने घर है उतना आना जाना कम उस के पिस्टल से एक गोली कम होने का मतलब है अपने शहर में उड़ने वाले गोल से एक परिंदा कम कल तो वो और उस की कश्ती बस जलने ही वाले थे दरिया उस पर काफी गरम था लेकिन आग से थोड़ा कम सदके जाऊँ उन चीज़ों पर जिन को उस के हाथ लगे अजब मैकेनिक था वो जिस ने तोड़ा ज़्यादा जोड़ा कम
Zia Mazkoor
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न चलती है न रुकती है फ़क़ीरा तिरी दुनिया भी अच्छी है फ़क़ीरा तुम्हें हटना पड़ेगा रास्ते से ये शाहों की सवारी है फ़क़ीरा हमारे ना-तवाँ कंधों पे मत रख तसव्वुफ़ भारी गठरी है फ़क़ीरा तिरी गद्दी को ले कर इतने झगड़े अभी तो पहली पीढ़ी है फ़क़ीरा फ़क़त ये सोच कर ख़ामोश हूँ मैं तुम्हारी रोज़ी-रोटी है फ़क़ीरा हम उस के आस्तां तक कैसे पहुँचे बड़ी लंबी कहानी है फ़क़ीरा हमारे मानने वालों में हो जा हमारा फ़ैज़ जारी है फ़क़ीरा
Zia Mazkoor
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ये बात सोच के तेरे हुए हैं हम दोनों के तुझ को ले के बहुत लड़ चुके हैं हम दोनों ये सरहदे तो अभी कल बनी है मेरे दोस्त हजारों साल इकट्ठे रहे हैं हम दोनों कोई तो था वो जो अब हाफ़िज़े का हिस्सा नहीं वो बात क्या थी जो भूले हुए हैं हम दोनों तुम ऐसी बात किसी को नहीं बताऊँगी मुझे लगा था बड़े हो चुके हैं हम दोनों हजारों जोड़े गुलाबों में छुप के बैठे हैं ये और बात के पकड़े गए हैैं हम दोनों
Zia Mazkoor
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किस तरह ईमान लाऊँ ख़्वाब की ता'बीर पर छिपकली चढ़ते हुए देखी है उस तस्वीर पर उस ने ऐसी कोठरी में क़ैद रक्खा था हमें रौशनी आँखों पे पड़ती थी या फिर ज़ंजीर पर माएँ बेटों से ख़फ़ा हैं और बेटे माँओं से इश्क़ ग़ालिब आ गया है दूध की तासीर पर मैं उन्हीं आबादियों में जी रहा होता कहीं तुम अगर हँसते नहीं उस दिन मेरी तक़दीर पर
Zia Mazkoor
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