अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं न जाने लोग भी क्या क्या अदाकारी दिखाते हैं यक़ीनन उन का जी भरने लगा है मेज़बानी से वो कुछ दिन से हमें जाती हुई लॉरी दिखाते हैं उलझना है हमें बंजर ज़मीनों की हक़ीक़त से उन्हें क्या वो तो बस काग़ज़ पे फुलवारी दिखाते हैं मदद करने से पहले तुम हक़ीक़त भी परख लेना यहाँ पर आदतन कुछ लोग लाचारी दिखाते हैं डराना चाहते हैं वो हमें भी धमकियाँ दे कर बड़े नादान हैं पानी को चिंगारी दिखाते हैं दरख़्तों की हिफ़ाज़त करने वालो डर नहीं जाना दिखाने दो अगर कुछ सर-फिरे आरी दिखाते हैं हिमाक़त क़ाबिल-ए-तारीफ़ है उन की 'अकेला' जी हमीं से काम है हम को ही रंग-दारी दिखाते हैं
Related Ghazal
पागल कैसे हो जाते हैं देखो ऐसे हो जाते हैं ख़्वाबों का धंधा करती हो कितने पैसे हो जाते हैं दुनिया सा होना मुश्किल है तेरे जैसे हो जाते हैं मेरे काम ख़ुदा करता है तेरे वैसे हो जाते हैं
Ali Zaryoun
158 likes
तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
249 likes
बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं
Rehman Faris
196 likes
ज़बाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में है उतार चढ़ाव मैं तुझे कैसे पढूँगा मुझे किताब तो दे तेरा सवाल है साक़ी कि ज़िंदगी क्या है? जवाब देता हूँ पहले मुझे शराब तो दे
Rahat Indori
190 likes
इक पल में इक सदी का मज़ा हम से पूछिए दो दिन की ज़िंदगी का मज़ा हम से पूछिए भूले हैं रफ़्ता रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम क़िस्तों में ख़ुद-कुशी का मज़ा हम से पूछिए आग़ाज़-ए-आशिक़ी का मज़ा आप जानिए अंजाम-ए-आशिक़ी का मज़ा हम से पूछिए जलते दियों में जलते घरों जैसी ज़ौ कहाँ सरकार रौशनी का मज़ा हम से पूछिए वो जान ही गए कि हमें उन सेे प्यार है आँखों की मुख़बिरी का मज़ा हम सेे पूछिए हँसने का शौक़ हम को भी था आप की तरह हँसिए मगर हँसी का मज़ा हम से पूछिए हम तौबा कर के मर गए बे-मौत ऐ 'ख़ुमार' तौहीन-ए-मय-कशी का मज़ा हम से पूछिए
Khumar Barabankvi
95 likes
More from Virendra Khare Akela
पहले तेरी जेब टटोली जाएगी फिर यारी की भाषा बोली जाएगी तेरी तह ली जाएगी तत्परता से ख़ुद के मन की गाँठ न खोली जाएगी नैतिकता की मैली होती ये चादर दौलत के साबुन से धो ली जाएगी टूटी इक उम्मीद पे ये मातम कैसा फिर कोई उम्मीद संजो ली जाएगी कौन तुम्हारा दुख अपना दुख समझेगा दिखलाने को आँख भिगो ली जाएगी कह दे कह दे फिर मुस्का कर कह दे तू तेरे ही घर मेरी डोली जाएगी झूटी शान 'अकेला' कितने दिन की है एक ही बारिश में रंगोली जाएगी
Virendra Khare Akela
0 likes
बंदा तो हुज़ूर आप के काम आया बहुत है ये भी है बजा आप ने ठुकराया बहुत है उल्फ़त है कि है दिल-लगी मुझ को नहीं मालूम फिर चाँद मुझे देख के मुस्काया बहुत है दुनिया मुझे सूली पे चढ़ा दे तो चढ़ा दे उल्फ़त का सबक़ मैं ने भी दोहराया बहुत है ये बात बजा की है मदद शुक्रिया साहिब एहसान मगर आप ने जतलाया बहुत है गुम-सुम सा कई रोज़ से दिखता है वो ज़ालिम शायद मिरा दिल तोड़ के पछताया बहुत है ख़ुद की भी कभी शक्ल ज़रा देख लें साहिब आईना मुझे आप ने दिखलाया बहुत है अब अक़्ल का दुश्मन जो न समझे तो न समझे मैं ने दिल-ए-नादान को समझाया बहुत है अफ़्सोस नहीं क़त्ल का मुझ को मिरे क़ातिल ग़म है यही तू ने मुझे तड़पाया बहुत है ईमान ओ धरम ताक पे देखो तो 'अकेला' पैसे के लिए आदमी पगलाया बहुत है
Virendra Khare Akela
0 likes
पहले तेरी जेब टटोली जाएगी फिर यारी की भाषा बोली जाएगी तेरी तह ली जाएगी तत्परता से ख़ुद के मन की गाँठ न खोली जाएगी नैतिकता की मैली होती ये चादर दौलत के साबुन से धो ली जाएगी टूटी इक उम्मीद पे ये मातम कैसा फिर कोई उम्मीद संजो ली जाएगी कौन तुम्हारा दुख अपना दुख समझेगा दिखलाने को आँख भिगो ली जाएगी कह दे कह दे फिर मुस्का कर कह दे तू तेरे ही घर मेरी डोली जाएगी झूटी शान 'अकेला' कितने दिन की है एक ही बारिश में रंगोली जाएगी
Virendra Khare Akela
0 likes
कुछ ऐसे ही तुम्हारे बिन ये दिल मेरा तरसता है खिलौनों के लिए मुफ़्लिस का ज्यूँँ बच्चा तरसता है गए वो दिन कि जब ये तिश्नगी फ़रियाद करती थी बुझाने को हमारी प्यास अब दरिया तरसता है नफ़ा नुक़सान का झंझट तो होता है तिजारत में मोहब्बत हो तो पीतल के लिए सोना तरसता है न जाने कब तलक होगी मेहरबानी घटाओं की चमन के वास्ते कितना ये वीराना तरसता है यही अंजाम अक्सर हम ने देखा है मोहब्बत का कहीं राधा तरसती है कहीं कान्हा तरसता है पता कुछ भी नहीं हम को मगर हम सब समझते हैं किसी बस्ती की ख़ातिर क्यूँ वो बंजारा तरसता है कि आख़िर ऐ 'अकेला' सब्र भी रक्खे कहाँ तक दिल बहुत कुछ बोलने को अब तो ये गूँगा तरसता है
Virendra Khare Akela
1 likes
ख़्वाब ख़ुश-फ़हमी ख़ुशी सब कुछ मिटा कर रख दिया उस ने दो ही रोज़ में मुझ को भुला कर रख दिया ये करिश्मा कम से कम इंसान के बस का नहीं किस ने फिर पत्थर पे ये पौधा उगा कर रख दिया सब की नज़रों में ये दौलत आ न जाए इस लिए मैं ने तेरा दर्द ग़ज़लों में छुपा कर रख दिया तर्क-ए-मय करने ही वाला था मगर अब क्या करूँँ जाम साक़ी ने मिरे हाथों पे ला कर रख दिया सिर्फ़ असली बात ही बोली नहीं कम्बख़्त ने कुल-जहाँ का यूँँ तो अफ़्साना सुना कर रख दिया क्या हसीं क्या पुर-सुकूँ सपना अधूरा रह गया और सो लेने दिया होता जगा कर रख दिया ऐ 'अकेला' हो गई अपनी भी रुस्वाई बहुत हम ने उस रुख़ से मगर पर्दा हटा कर रख दिया
Virendra Khare Akela
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Virendra Khare Akela.
Similar Moods
More moods that pair well with Virendra Khare Akela's ghazal.







