ghazalKuch Alfaaz

ایک نیک بادشاہ رات کو بھیس بدل کر پھرا کرتا تھا کہ لوگوں کا اصلی حال دیکھ کر جہاں تک ہو سکے، ان کی تکلیفیں دور کر دیا کرے۔ جاڑے کے موسم میں وہ ایک رات شہر کے باہر کسی ویران مکان کے پاس سے جا رہا تھا ہ دو آدمیوں کے بولنے کی آواز آئی۔ کان لگا کر سنا تو ایک آدمی کہہ رہا تھا ’’لوگ بادشاہ کو خدا ترس تو کہتےہیں، مگر یہ کہاں کی خدا ترسی ہے کہ وہ اپنے محلوں میں نرم اور گرم بستروں پر سوئے اور مسافر جنگل کی ان برفانی ہواؤں میں مریں۔ خدا کی قسم، اگر قیامت کے دن وہ بہشت میں بھیجا گیا تو میں کبھی نہ جانے دوں گا۔‘‘ دوسرے نے کہا۔ ’’حکومت میں خدا ترسی کہاں؟ یہ خوشامدیوں کی باتیں ہیں۔‘‘ یہ سن کر نیک بادشاہ واپس چلا آیا او رمحل میں پہنچ کر حکم دیا کہ ’’دو غریب مسافر جو شہر کے باہر فلاں جگہ پڑے ہوئے ہیں، انہیں اسی وقت لے آؤ اور کھانا کھلا کر آرام سے سلا دو۔‘‘ چنانچہ فوراً حکم کی تعمیل ہوگئی۔ صبح جب دن چڑھا تو بادشاہ نے بلا کر مسافروں سے کہا۔ بھائیو! شہر کے باہر تمہیں تکلیف تو ضرور ہوئی، مگر یہ تمہارا اپنا قصور تھا کہ نو بجے رات تک بھی شہر میں نہ آئے اور دروازہ بند ہو گیا۔ پھر بھی میں نے آج شہر کے باہر ایک سرائے بنانے کا حکم دے کر تم سے صلح کر لی ہے۔ امید ہے کہ تم بھی اب قیامت کے دن مجھ سے دشمنی نہ رکھو گے۔ مسافروں نے شرمندگی سے سر نیچا کر لیا اور بادشاہ کی نیکی کے گیت گاتے ہوئے گھروں کو چلے گئے۔

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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं सुना है रब्त है उस को ख़राब-हालों से सो अपने आप को बर्बाद कर के देखते हैं सुना है दर्द की गाहक है चश्म-ए-नाज़ उस की सो हम भी उस की गली से गुज़र के देखते हैं सुना है उस को भी है शे'र ओ शा'इरी से शग़फ़ सो हम भी मो'जिज़े अपने हुनर के देखते हैं सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है सितारे बाम-ए-फ़लक से उतर के देखते हैं सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती हैं सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते हैं सुना है हश्र हैं उस की ग़ज़ाल सी आँखें सुना है उस को हिरन दश्त भर के देखते हैं सुना है रात से बढ़ कर हैं काकुलें उस की सुना है शाम को साए गुज़र के देखते हैं सुना है उस की सियह-चश्मगी क़यामत है सो उस को सुरमा-फ़रोश आह भर के देखते हैं सुना है उस के लबों से गुलाब जलते हैं सो हम बहार पे इल्ज़ाम धर के देखते हैं सुना है आइना तिमसाल है जबीं उस की जो सादा दिल हैं उसे बन-सँवर के देखते हैं सुना है जब से हमाइल हैं उस की गर्दन में मिज़ाज और ही लाल ओ गुहर के देखते हैं सुना है चश्म-ए-तसव्वुर से दश्त-ए-इम्काँ में पलंग ज़ाविए उस की कमर के देखते हैं सुना है उस के बदन की तराश ऐसी है कि फूल अपनी क़बाएँ कतर के देखते हैं वो सर्व-क़द है मगर बे-गुल-ए-मुराद नहीं कि उस शजर पे शगूफ़े समर के देखते हैं बस इक निगाह से लुटता है क़ाफ़िला दिल का सो रह-रवान-ए-तमन्ना भी डर के देखते हैं सुना है उस के शबिस्ताँ से मुत्तसिल है बहिश्त मकीं उधर के भी जल्वे इधर के देखते हैं रुके तो गर्दिशें उस का तवाफ़ करती हैं चले तो उस को ज़माने ठहर के देखते हैं किसे नसीब कि बे-पैरहन उसे देखे कभी कभी दर ओ दीवार घर के देखते हैं कहानियाँ ही सही सब मुबालग़े ही सही अगर वो ख़्वाब है ता'बीर कर के देखते हैं अब उस के शहर में ठहरें कि कूच कर जाएँ 'फ़राज़' आओ सितारे सफ़र के देखते हैं

Ahmad Faraz

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सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो कहीं नहीं कोई सूरज धुआँ धुआँ है फ़ज़ा ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

Nida Fazli

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वो एक पक्षी जो गुंजन कर रहा है वो मुझ में प्रेम सृजन कर रहा है बहुत दिन हो गए है तुम सेे बिछड़े तुम्हें मिलने को अब मन कर रहा है नदी के शांत तट पर बैठ कर मन तेरी यादें विसर्जन कर रहा है

Azhar Iqbal

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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