ghazalKuch Alfaaz

हिज्र कहाँ तक सह पाओगी इश्क़ करो तन्हाई में मर जाओगी इश्क़ करो एक ही दिल है दिल की चाहत मत मारो आख़िर इक दिन पछताओगी इश्क़ करो तकिया टेडी बीयर और खिलौनों से कब तक ख़ुद को बहलाओगी इश्क़ करो कितने दिन तक कितने सारे लड़कों को दोस्त बना कर टहलाओगी इश्क़ करो

Related Ghazal

तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

249 likes

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूँढ़ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँँ इतने हिजाबों में मिलें आज हम दार पे खींचे गए जिन बातों पर क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है 'फ़राज़' जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें

Ahmad Faraz

130 likes

उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

Waseem Barelvi

107 likes

बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं

Rehman Faris

196 likes

थोड़ा लिक्खा और ज़ियादा छोड़ दिया आने वालों के लिए रस्ता छोड़ दिया तुम क्या जानो उस दरिया पर क्या गुज़री तुम ने तो बस पानी भरना छोड़ दिया लड़कियाँ इश्क़ में कितनी पागल होती हैं फ़ोन बजा और चूल्हा जलता छोड़ दिया रोज़ इक पत्ता मुझ में आ गिरता है जब से मैं ने जंगल जाना छोड़ दिया बस कानों पर हाथ रखे थे थोड़ी देर और फिर उस आवाज़ ने पीछा छोड़ दिए

Tehzeeb Hafi

262 likes

More from Kumar Vikas

तुम ने कहा ख़राब चलो हम ख़राब हैं दें और क्या जवाब चलो हम ख़राब हैं कैसी वफ़ा कहाँ की वफ़ा कौन सी वफ़ा सब छोड़ दो हिसाब चलो हम ख़राब हैं हम ने शरीफ़ होने की क़ीमत चुकाई है लाओ ज़रा शराब चलो हम ख़राब हैं जिस ख़ूबसूरती से ज़फा कर रहे हो तुम वो फ़न है लाजवाब चलो हम ख़राब हैं

Kumar Vikas

3 likes

ग़ैरों को अब गले लगाओ, जाओ तुम को छोड़ दिया सब को मेरे ऐब गिनाओ, जाओ तुम को छोड़ दिया कैसा हूँ? किस हाल में हूँ? क्यूँ पूछ रही हो अब मुझ सेे? फिर से माथा मत ठनकाओ, जाओ तुम को छोड़ दिया किस सेे मिलने की ख़्वाहिश आँखों में भर कर आई हो? जाओ-जाओ, जल्दी जाओ, जाओ तुम को छोड़ दिया चाहा था कि नाम तुम्हारा साथ हमारे आएगा अब चाहे जिस की कहलाओ, जाओ तुम को छोड़ दिया हम ही कितने पागल थे जो तुम पर ग़ज़लें कहते थे अब मत कहना शे'र सुनाओ, जाओ तुम को छोड़ दिया

Kumar Vikas

7 likes

अलग धारे में बहते हैं, यहीं तक साथ था अपना चलो कश्ती बदलते हैं, यहीं तक साथ था अपना यही तक़दीर का लिक्खा, यही है वक़्त की मर्ज़ी यही हालात कहते हैं, यहीं तक साथ था अपना जुदा होने पे अश्कों की रवायत तोड़ दी जाए चलो हँसकर बिछड़ते हैं, यहीं तक साथ था अपना तुम्हारी इक नई दुनिया तुम्हें आवाज़ देती है सुनो अब हम निकलते हैं, यहीं तक साथ था अपना सफ़र भी दूर का है शाम भी ढलने को आई है इजाज़त दो कि चलते हैं, यहीं तक साथ था अपना

Kumar Vikas

5 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Kumar Vikas.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Kumar Vikas's ghazal.