हम ऐसे इश्क़ के मारों को तन्हा मार देती है मोहब्बत जान की प्यासी है बंदा मार देती है अलग अंदाज़ हैं दोनों के अपनी बात कहने के मैं उस पे शे'र कहता हूँ, वो ताना मार देती है हम उस के दिल में रहते हैं सो अच्छे हैं वगरना दोस्त अदाओं से तो आशिक़ को वो ज़िंदा मार देती है किसी रस्सी, किसी पंखे पे ये इल्ज़ाम आया पर कोई ख़ुद से नहीं मरता ये दुनिया मार देती है हम ऐसे लोग ग़लती से कभी जो ख़्वाब देखें तो ग़रीबी ख़्वाब के मुँह पे तमाचा मार देती है
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उस ने दो चार कर दिया मुझ को ज़ेहनी बीमार कर दिया मुझ को क्यूँ नहीं दस्तरस में तू मेरे क्यूँ तलबगार कर दिया मुझ को कभी पत्थर कभी ख़ुदा उस ने चाहा जो यार कर दिया मुझ को उस सेे कोई सवाल मत करना उस ने इनकार कर दिया मुझ को एक इंसान ही तो माँगा था उस को भी मार कर दिया मुझ को
Himanshi babra KATIB
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वो तो अच्छा है ग़ज़ल तेरा सहारा है मुझे वर्ना फ़िक्रों ने तो बस घेर के मारा है मुझे जिस की तस्वीर मैं काग़ज़ पे बना भी न सका उस ने मेहँदी से हथेली पे उतारा है मुझे ग़ैर के हाथ से मरहम मुझे मंज़ूर नहीं तुम मगर ज़ख़्म भी दे दो तो गवारा है मुझे
Abrar Kashif
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मैं भी तुम जैसा हूँ अपने से जुदा मत समझो आदमी ही मुझे रहने दो ख़ुदा मत समझो ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो रास आता नहीं सब को ये मोहब्बत का मरज़ मेरी बीमारी को तुम अपनी दवा मत समझो
Shakeel Azmi
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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इन को दुख कि हम से वो कहते ये कैसे हम ग़लत थे इस लिए पहले ही हम ने कह दिया कि हम ग़लत थे वो ख़फ़ा हैं जाने कब से क्या पता किस बात पे हों फ़र्ज़ बनता है हमारा कह दें उन से हम ग़लत थे तुम इशारा कर तो देते कि नहीं जाना है तुम को रोक लेते हम तुम्हें कह देते सब से हम ग़लत थे हम किसी भी तौर उस को साथ रखना चाहते थे हम ने मुआ'फ़ी माँग ली ऐसे कि जैसे हम ग़लत थे हम लड़ेंगे ख़ूब दोनों पहले तो इक दूजे से फिर रोते रोते ये कहेंगे हम ग़लत थे हम ग़लत थे
Ankit Maurya
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कैसे बताऊँ अब मुझे क्या-क्या नहीं पसंद बस तू पसंद है कोई तुझ-सा नहीं पसंद नींदें उड़ा गए जो इन आँखों के ख़्वाब थे ऐसा नहीं कि अब मुझे सोना नहीं पसंद लौटा के जब से आएँ हैं कॉपी वो उस की हम तब से हमें तो अपना ही बस्ता नहीं पसंद पहले बनाया उस ने तो अपनी तरह मुझे कहता है अब कि मैं उसे ऐसा नहीं पसंद जिस्मों के रस्ते अा गए हैं दिल तलक तो हम आसाँ बहुत है पर, हमें रस्ता नहीं पसंद फिर आप ऐसी दरिया पे लानत ही भेजिए मेरी तरह का गर उसे प्यासा नहीं पसंद..
Ankit Maurya
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