कैसे बताऊँ अब मुझे क्या-क्या नहीं पसंद बस तू पसंद है कोई तुझ-सा नहीं पसंद नींदें उड़ा गए जो इन आँखों के ख़्वाब थे ऐसा नहीं कि अब मुझे सोना नहीं पसंद लौटा के जब से आएँ हैं कॉपी वो उस की हम तब से हमें तो अपना ही बस्ता नहीं पसंद पहले बनाया उस ने तो अपनी तरह मुझे कहता है अब कि मैं उसे ऐसा नहीं पसंद जिस्मों के रस्ते अा गए हैं दिल तलक तो हम आसाँ बहुत है पर, हमें रस्ता नहीं पसंद फिर आप ऐसी दरिया पे लानत ही भेजिए मेरी तरह का गर उसे प्यासा नहीं पसंद..
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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता
Tehzeeb Hafi
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चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ सारे मर्द एक जैसे हैं तुम ने कैसे कह डाला मैं भी तो एक मर्द हूँ तुम को ख़ुद से बेहतर मानता हूँ मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्कियत का दावा नहीं वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ
Ali Zaryoun
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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
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तेरे पीछे होगी दुनिया पागल बन क्या बोला मैं ने कुछ समझा? पागल बन सहरा में भी ढूँढ़ ले दरिया पागल बन वरना मर जाएगा प्यासा पागल बन आधा दाना आधा पागल नइँ नइँ नइँ उस को पाना है तो पूरा पागल बन दानाई दिखलाने से कुछ हासिल नहीं पागल खाना है ये दुनिया पागल बन देखें तुझ को लोग तो पागल हो जाएँ इतना उम्दा इतना आला पागल बन लोगों से डर लगता है तो घर में बैठ जिगरा है तो मेरे जैसा पागल बन
Varun Anand
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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला
Tehzeeb Hafi
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इन को दुख कि हम से वो कहते ये कैसे हम ग़लत थे इस लिए पहले ही हम ने कह दिया कि हम ग़लत थे वो ख़फ़ा हैं जाने कब से क्या पता किस बात पे हों फ़र्ज़ बनता है हमारा कह दें उन से हम ग़लत थे तुम इशारा कर तो देते कि नहीं जाना है तुम को रोक लेते हम तुम्हें कह देते सब से हम ग़लत थे हम किसी भी तौर उस को साथ रखना चाहते थे हम ने मुआ'फ़ी माँग ली ऐसे कि जैसे हम ग़लत थे हम लड़ेंगे ख़ूब दोनों पहले तो इक दूजे से फिर रोते रोते ये कहेंगे हम ग़लत थे हम ग़लत थे
Ankit Maurya
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हम ऐसे इश्क़ के मारों को तन्हा मार देती है मोहब्बत जान की प्यासी है बंदा मार देती है अलग अंदाज़ हैं दोनों के अपनी बात कहने के मैं उस पे शे'र कहता हूँ, वो ताना मार देती है हम उस के दिल में रहते हैं सो अच्छे हैं वगरना दोस्त अदाओं से तो आशिक़ को वो ज़िंदा मार देती है किसी रस्सी, किसी पंखे पे ये इल्ज़ाम आया पर कोई ख़ुद से नहीं मरता ये दुनिया मार देती है हम ऐसे लोग ग़लती से कभी जो ख़्वाब देखें तो ग़रीबी ख़्वाब के मुँह पे तमाचा मार देती है
Ankit Maurya
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