इन को दुख कि हम से वो कहते ये कैसे हम ग़लत थे इस लिए पहले ही हम ने कह दिया कि हम ग़लत थे वो ख़फ़ा हैं जाने कब से क्या पता किस बात पे हों फ़र्ज़ बनता है हमारा कह दें उन से हम ग़लत थे तुम इशारा कर तो देते कि नहीं जाना है तुम को रोक लेते हम तुम्हें कह देते सब से हम ग़लत थे हम किसी भी तौर उस को साथ रखना चाहते थे हम ने मुआ'फ़ी माँग ली ऐसे कि जैसे हम ग़लत थे हम लड़ेंगे ख़ूब दोनों पहले तो इक दूजे से फिर रोते रोते ये कहेंगे हम ग़लत थे हम ग़लत थे
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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
Fahmi Badayuni
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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं
Rehman Faris
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ज़बाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में है उतार चढ़ाव मैं तुझे कैसे पढूँगा मुझे किताब तो दे तेरा सवाल है साक़ी कि ज़िंदगी क्या है? जवाब देता हूँ पहले मुझे शराब तो दे
Rahat Indori
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थोड़ा लिक्खा और ज़ियादा छोड़ दिया आने वालों के लिए रस्ता छोड़ दिया तुम क्या जानो उस दरिया पर क्या गुज़री तुम ने तो बस पानी भरना छोड़ दिया लड़कियाँ इश्क़ में कितनी पागल होती हैं फ़ोन बजा और चूल्हा जलता छोड़ दिया रोज़ इक पत्ता मुझ में आ गिरता है जब से मैं ने जंगल जाना छोड़ दिया बस कानों पर हाथ रखे थे थोड़ी देर और फिर उस आवाज़ ने पीछा छोड़ दिए
Tehzeeb Hafi
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किसी लिबास की ख़ुशबू जब उड़ के आती है तेरे बदन की जुदाई बहुत सताती है तेरे गुलाब तरसते हैं तेरी ख़ुशबू को तेरी सफ़ेद चमेली तुझे बुलाती है तेरे बग़ैर मुझे चैन कैसे पड़ता हैं मेरे बगैर तुझे नींद कैसे आती है
Jaun Elia
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हम ऐसे इश्क़ के मारों को तन्हा मार देती है मोहब्बत जान की प्यासी है बंदा मार देती है अलग अंदाज़ हैं दोनों के अपनी बात कहने के मैं उस पे शे'र कहता हूँ, वो ताना मार देती है हम उस के दिल में रहते हैं सो अच्छे हैं वगरना दोस्त अदाओं से तो आशिक़ को वो ज़िंदा मार देती है किसी रस्सी, किसी पंखे पे ये इल्ज़ाम आया पर कोई ख़ुद से नहीं मरता ये दुनिया मार देती है हम ऐसे लोग ग़लती से कभी जो ख़्वाब देखें तो ग़रीबी ख़्वाब के मुँह पे तमाचा मार देती है
Ankit Maurya
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कैसे बताऊँ अब मुझे क्या-क्या नहीं पसंद बस तू पसंद है कोई तुझ-सा नहीं पसंद नींदें उड़ा गए जो इन आँखों के ख़्वाब थे ऐसा नहीं कि अब मुझे सोना नहीं पसंद लौटा के जब से आएँ हैं कॉपी वो उस की हम तब से हमें तो अपना ही बस्ता नहीं पसंद पहले बनाया उस ने तो अपनी तरह मुझे कहता है अब कि मैं उसे ऐसा नहीं पसंद जिस्मों के रस्ते अा गए हैं दिल तलक तो हम आसाँ बहुत है पर, हमें रस्ता नहीं पसंद फिर आप ऐसी दरिया पे लानत ही भेजिए मेरी तरह का गर उसे प्यासा नहीं पसंद..
Ankit Maurya
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