ghazalKuch Alfaaz

इस से पहले कि कोई और हटा दे मुझ को अपने पहलू से कहीं दूर बिठा दे मुझ को मैं सुख़न-फ़हम किसी वस्ल का मुहताज नहीं चाँदनी रात है इक शे'र सुना दे मुझ को ख़ुद-कुशी करने के मौसम नहीं आते हर रोज़ ज़िंदगी अब कोई रस्ता न दिखा दे मुझ को एक ये ज़ख़्म ही काफ़ी है मिरे जीने को चारा-गर ठीक न होने की दवा दे मुझ को यूँँ तो सूरज हूँ मगर फ़िक्र लगी रहती है वो चराग़ों के भरम में न बुझा दे मुझ को तुझ को मा'लूम नहीं इश्क़ किसे कहते हैं अपने सीने पे नहीं दिल में जगह दे मुझ को हर नए शख़्स पे खुल जाने की आदत 'मोहन' देने वाले से कहो थोड़ी अना दे मुझ को

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वो मुँह लगाता है जब कोई काम होता है जो उस का होता है समझो ग़ुलाम होता है किसी का हो के दुबारा न आना मेरी तरफ़ मोहब्बतों में हलाला हराम होता है इसे भी गिनते हैं हम लोग अहल-ए-ख़ाना में हमारे याँ तो शजर का भी नाम होता है तुझ ऐसे शख़्स के होते हैं ख़ास दोस्त बहुत तुझ ऐसा शख़्स बहुत जल्द आम होता है कभी लगी है तुम्हें कोई शाम आख़िरी शाम हमारे साथ ये हर एक शाम होता है

Umair Najmi

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मुझे उदास कर गए हो ख़ुश रहो मिरे मिज़ाज पर गए हो ख़ुश रहो मिरे लिए न रुक सके तो क्या हुआ जहाँ कहीं ठहर गए हो ख़ुश रहो ख़ुशी हुई है आज तुम को देख कर बहुत निखर सँवर गए हो ख़ुश रहो उदास हो किसी की बे-वफ़ाई पर वफ़ा कहीं तो कर गए हो ख़ुश रहो गली में और लोग भी थे आश्ना हमें सलाम कर गए हो ख़ुश रहो तुम्हें तो मेरी दोस्ती पे नाज़ था इसी से अब मुकर गए हो ख़ुश रहो किसी की ज़िन्दगी बनो कि बंदगी मिरे लिए तो मर गए हो ख़ुश रहो

Fazil Jamili

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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ऐश माज़ी के गिना हाल का ता'ना दे दे घर पलटने के लिए कोई बहाना दे दे मैं ने इस शहर को इक शख़्स का हमनाम किया चाहे अब जो भी इसे नाम ज़माना दे दे संग-ज़ादों को भी ता'मीर में शामिल कर लो इस से पहले कि कोई आइना-ख़ाना दे दे उस का रूमाल भी मजबूरी था हमदर्दी नहीं उस को ये डर था कोई और न शाना दे दे दिल के उजड़े हुए जंगल को पड़ा रहने दो ऐन मुमकिन है परिंदों को ठिकाना दे दे

Balmohan Pandey

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समय से पहले भले शामे-ज़िंदगी आए, किसी तरह भी उदासी का घाव भर जाए जो शे'र समझे मुझे दाद वाद देता रहे, गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए हम उदास नहीं सर ब सर उदासी हैं, हमें चराग़ नहीं रौशनी कहा जाए किसी के हँसने से रौशन हुई थी बादे-सबा, कोई उदास हुआ तो गुलाब मुरझाए

Balmohan Pandey

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समय से पहले भले शाम-ए-ज़िंदगी आए किसी तरह भी उदासी का घाव भर जाए हम अब उदास नहीं सर-ब-सर उदासी हैं हमें चराग़ नहीं रौशनी कहा जाए जो शे'र समझे मुझे दाद-वाद देता रहे गले लगाए जिसे ग़म समझ में आ जाए गए दिनों में कोई शौक़ था मोहब्बत का अब इस अज़ाब में ये ज़ेहन कौन उलझाए किसी के हँसने से रौशन हुई थी बाद-ए-सबा कोई उदास हुआ तो गुलाब मुरझाए ये एक दुख ही दबा रह गया है आँखों में वो एक मिसरा जिसे शे'र कर नहीं पाए अगर हूँ ग़ुस्से में फिर भी मैं चाहता ये हूँ मैं सिर्फ़ हिज्र कहूँ और फ़ोन कट जाए

Balmohan Pandey

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दयार-ए-ग़म से हम बाहर निकल के शे'र कहते हैं मसाइल हैं बहुत से उन में ढल के शे'र कहते हैं दहकते आग के शो'लों पे चल के शे'र कहते हैं हमें पहचान लीजे हम ग़ज़ल के शे'र कहते हैं रिवायत के पुजारी इस लिए नाराज़ हैं हम से ख़ता ये है नए रस्तों पे चल के शे'र कहते हैं हमें तन्हाइयों का शोर जब बेचैन करता है इकट्ठी करते हैं यादें ग़ज़ल के शे'र कहते हैं सितारों की तरह रौशन हैं जिन के लफ़्ज़ ज़ेहनों में वो शायद मोम की सूरत पिघल के शे'र कहते हैं हमारी शाइ'री उस को कहीं रुस्वा न कर डाले सो उस के शहर में थोड़ा सँभल के शे'र कहते

Balmohan Pandey

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रवानगी में समय का ख़याल करते हैं फिर उस को भेज के पहरों मलाल करते हैं ज़रा से तल्ख़-बयानी पसंद हैं फिर भी उदास लोग मोहब्बत कमाल करते हैं अब उन को इश्क़ के आदाब कौन समझाए बुझे चराग़ हवा से सवाल करते हैं गुनह है इश्क़ पे पाबंदियाँ बजा लेकिन तुम्हारे लोग तो जीना मुहाल करते हैं इस एक जुमले ने करने नहीं दिया कुछ भी जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं

Balmohan Pandey

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