कितनी शर्मीली लजीली है हवा बरसात की मिलती है उन की अदास हर अदा बरसात की जाने किस महिवाल से आती है मिलने के लिए सोहनी गाती हुई सौंधी हवा बरसात की उस के घर भी तुझ को आना चाहिए था ऐ बहार जिस ने सब के वास्ते माँगी दुआ बरसात की अब की बारिश में न रह जाए किसी के दिल में मैल सब की गगरी धो के भर दे ऐ घटा बरसात की देखिए कुछ ऐसे भी बीमार हैं बरसात के बोतलों में ले के निकले हैं दवा बरसात की जेब अपनी देख कर मौसम से यारी कीजिए अब की महँगी है बहुत आब-ओ-हवा बरसात की बादलों की घन-गरज को सुन के बच्चे की तरह चौंक चौंक उठती है रह रह कर फ़ज़ा बरसात की रास्ते में तुम अगर भीगे तो ख़फ़गी मुझ पे क्यूँँ मेरे मुंसिफ़ पे ख़ता मेरी है या बरसात की हम तो बारिश में खुली छत पर न सोएँगे 'नज़ीर' आप तन्हा अपने सर लीजे बला बरसात की देखिए कुछ ऐसे भी बीमार हैं बरसात के बोतलों में ले के निकले हैं दवा बरसात की जेब अपनी देख कर मौसम से यारी कीजिए अब की महँगी है बहुत आब-ओ-हवा बरसात की बादलों की घन-गरज को सुन के बच्चे की तरह चौंक चौंक उठती है रह रह कर फ़ज़ा बरसात की रास्ते में तुम अगर भीगे तो ख़फ़गी मुझ पे क्यूँँ मेरे मुंसिफ़ पे ख़ता मेरी है या बरसात की हम तो बारिश में खुली छत पर न सोएँगे 'नज़ीर' आप तन्हा अपने सर लीजे बला बरसात की
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थोड़ा लिक्खा और ज़ियादा छोड़ दिया आने वालों के लिए रस्ता छोड़ दिया तुम क्या जानो उस दरिया पर क्या गुज़री तुम ने तो बस पानी भरना छोड़ दिया लड़कियाँ इश्क़ में कितनी पागल होती हैं फ़ोन बजा और चूल्हा जलता छोड़ दिया रोज़ इक पत्ता मुझ में आ गिरता है जब से मैं ने जंगल जाना छोड़ दिया बस कानों पर हाथ रखे थे थोड़ी देर और फिर उस आवाज़ ने पीछा छोड़ दिए
Tehzeeb Hafi
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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को
Naseer Turabi
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ज़बाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में है उतार चढ़ाव मैं तुझे कैसे पढूँगा मुझे किताब तो दे तेरा सवाल है साक़ी कि ज़िंदगी क्या है? जवाब देता हूँ पहले मुझे शराब तो दे
Rahat Indori
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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है
Shabeena Adeeb
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किस तरफ़ को चलती है अब हवा नहीं मालूम हाथ उठा लिए सबने और दुआ नहीं मालूम मौसमों के चेहरों से ज़र्दियाँ नहीं जाती फूल क्यूँँ नहीं लगते ख़ुश-नुमा नहीं मालूम रहबरों के तेवर भी रहज़नों से लगते हैं कब कहाँ पे लुट जाए क़ाफ़िला नहीं मालूम सर्व तो गई रुत में क़ामतें गँवा बैठे क़ुमरियाँ हुईं कैसे बे-सदा नहीं मालूम आज सब को दावा है अपनी अपनी चाहत का कौन किस से होता है कल जुदा नहीं मालूम मंज़रों की तब्दीली बस नज़र में रहती है हम भी होते जाते हैं क्या से क्या नहीं मालूम हम 'फ़राज़' शे'रों से दिल के ज़ख़्म भरते हैं क्या करें मसीहा को जब दवा नहीं मालूम
Ahmad Faraz
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